छंद प्रसंग
1.गुजरिया रह-रह घबराता है अब मोरा जिया चलो चलें गोदना गोदाये पिया। हाथों मे हाथ लिए मेले मे साथ चलें मैं सब कुछ हार चुकी तुम सब कुछ जीत चुके तुम्ही कहो जादू ये कौन सा किया। दाहिनी कलाई पर नाम मै लिखाऊँगी गाँव की गुजरिया हूँ भूल नही पाऊँगी लुका छिपी मे अब...
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भारतेंदु मिश्र
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[09 May 2010 02:47 AM]



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