शांत रहिये, विकास हो रहा है......
दोस्तों, विकास के दौर में जो शहरों की हालत हो रही है वो किसी से छुपी नहीं है, विकास की परिभाषा सभी ने अपनी अपनी गढ़ी है, ये मेरा विकास और ये तुम्हारा विकास, विकास की मार झेलते हुए संवेदनाएं जाग्रत हो गयीं और कविता बन गयी...... Normal 0 false false false...
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sanjeev persai
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[09 May 2010 02:44 AM]



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