जाति के आधार पर जनगणना स्वीकार कर सरकार ने भविष्य की राजनीति के लिए नया मुद्दा दे दिया है
जात पात पूछे नहीं कोय, हरि को भजै सो हरि का होय। कभी यह बात बहुत अपीलकरती थी, राजनीति में लेकिन आज बात पूरी तरह से बदल गयी है। कभी राममनोहर लोहिया जनेऊ तोड़ो आंदोलन चलाते थे। रानी के विरुद्ध दलित महिला कोमैदान में उतारते थे। आज उनके ही समर्थक संसद में...
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विष्णु सिन्हा
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[09 May 2010 02:19 AM]



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