मातृ ऋण से कुछ तो खुद को उॠण कर लेना

zakhm मत करोमेरा वंदन अभिनन्दनमत करोयाद तुमसिर्फ एक दिन मत दो सम्मान अभीफर्क नहीं पड़ता अभी तो मैंअपना बोझ उठा लूँगीतुम पर जान न्यौछावरकर दूंगी अपनी दुआओं में सिर्फ तुम्हाराही नाम लूँगी अभी तो शक्तिहै मुझमें  अभी... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[09 May 2010 02:14 AM]

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