दरख़्त

रचना रवीन्द्र दरख़्तमैं बाहर से सख्त होना चाहती हूँ.त्यज कर सारी कुटिलता,ओढ़ कर मुख पे जटिलता,   आश्वस्त होना चाहती हूँ.   मैं एक दरख़्त होना चाहती हूँ.   उजड़ गए जो कुछ घरोंदे,   सांसों में रहते थे मेरे,  ... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित

कविता

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[09 May 2010 01:45 AM]

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