इक-इक कतरे का हिसाब चाहिए ...!!!

के.सी.वर्मा अपने लहू के इक -इक कतरे का हिसाब चाहिए ! फंदे पर लटकते 'अजमल 'और 'कसाब'चाहिए! जिनका बहा है खून जरा ,उनके दिल से पूछिए , जो देखा था आँखों ने वो , सुंदर सा ख्वाब चाहिए ! कितनी गैरत बाकि है इस देश में ,गैरों के लिये ,क्यों ? ये मेहमान नवाजी इनकी .जवाब चाहिए... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश वर्मा
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[09 May 2010 01:49 AM]

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