मां ! तुझसा नहीं कोई रिश्ता
लो एक बार फिर से आ गया मां-दिवस एक बार फिर से सुबह सुबह दी मुबारक़बाद उन्हें फ़ोन पर और बताया, आज है मां का दिन यानि मां-दिवसजानती तो नहीं कब और क्यों शुरू हुआ ये दिन जानती बस इतना हूं, है अधूरा हर दिन, तुम बिन दूर हूं, पर तुम हो दिल में हर पल-छिन है दुआ,...
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रवीन्द्र गोयल्
लता
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[09 May 2010 01:57 AM]



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