माँ तेरे चरणों में हम शीश झुकाते हैं

समयचक्र हे माँ मैं बहुत ही खुशनसीब हूँ की अपने मुझे जन्म दिया है और आपकी छत्र छाया में मै पला बड़ा हूँ . आज आप इस दुनिया में नहीं हैं पर मैं आपको भूल नहीं पाया हूँ और जब तक मेरा जीवन रहेगा मैं आपको कभी विस्मृत नहीं कर पाऊंगा . कभी कभी ऐसा आभास होता है की आप मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer महेन्द्र मिश्र
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[09 May 2010 01:08 AM]

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