माँ!
सूरज के जागने से पहले जागतीचिड़ियों के चहकने से पहले,आँगन बुहारतीमुझे नींद से जगाने के लिएदुलरातीअपने पद चिह्नों परचलने को प्रेरित करतीमर्यादा और संस्कार कि धरोहर समेटेआदर और स्नेह कि सीख देतीमैंने,उसे कर्तव्यों का निर्वहन करते भी देखा है--अपने अधिकारों...
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Jyotsna Pandey
मां
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[08 May 2010 23:45 PM]



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