संत कबीर के दोहे-मोल लिया ईश्वर बोलता नहीं (parmatma ka mahatva-kabir ke dohe)
मूरति धरि धंधा रखा, पाहन का जगदीशमोल लिया बोलै नहीं, खोटा विसवा बीससंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि लोग मूर्ति का भगवान बनाकर उसकी सेवा करने के बहाने अपना धंधा करते हैं, पर वह मोल लिया ईश्वर बोलता नहीं है इसलिये नकली है।वर्तमान संदर्भ में व्याख्या...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू
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[08 May 2010 23:13 PM]



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