कहां खो गये
जागे थे भाग कभीबजे ढ़ोल, बंटे बताशे भीलोरी और पालने के स्वर भी वहींफिर आज न जाने वे नन्दलाल कहां खो गये?मां आज तू नितान्त अकेली हो गई।नहला धुलाकरसाफ-सुथरे कपड़े पहनालगा दिये थे तूने काजल के टीकेफिर आज न जाने वो झूलेलाल कहां खो गये ?मां आज तू नितान्त अकेली...
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Vimla Bhandari
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[08 May 2010 22:31 PM]



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