आज कंमेंटियाने की ज़िद ना करो…

बस यूँ ही निट्ठल्ला इतने दिनों की ग़ैरहाज़िरी की भरपायी करने की ठान रखी थी, सोचा कि आज दो नये पोस्ट अवश्य दूँगा । मेरे सँकल्प को जब नींद टँगड़ी मारने लगी तो, सोने से पहले अम्मा को हिदायद दी कि, एक ज़रूरी काम है.. सो मुझे तीन बजे जगा दीजियेगा । घर में बूढ़े-बुज़ुर्ग होने का यह एक... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[25 Apr 2010 22:19 PM]

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