माँ.....

सीधी खरी बात.. एक खूबसूरत एहसास... जो खुद अपने आप में पूरी दुनिया को समेटे हुए है. जिसके दिख जाने से ही लगता है कि जैसे अब दुनिया की कोई भी मुश्किल आ जाये मेरा कुछ नहीं बिगड़ने वाला. पता नहीं कितनी बार पापा के क्रोध से बचाकर प्यार भरी झिड़की से ही घर का सारा तनाव गायब... [पूरी पोस्ट]
writer डा०आशुतोष शुक्ल

मां

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[08 May 2010 20:57 PM]

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