हे! माता
ह्रदय हिमालय नाम है, माता कण-कण में स्थान है, माँ का स्नेह छत्र में प्रेम बरसता धरती पर भगवान है, माता बोली कि शुरुआत है, माता मुश्किलों में आराम है, माता अदि तू ही है, अंत भी तू ही ममता का संसार है, माता चरणों में स्वर्गधाम है, माँ का खुशियों का...
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विशाल कश्यप
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[08 May 2010 20:56 PM]



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