जब तें उमा सैल गृह जाईं..
मित्रो!विचित्र है यह भारतवर्ष। एक ओर हम स्त्री को लक्ष्मी का रूप मानते हैं और दूसरी ओर स्त्री भ्रूण की हत्या करते समय हमारा कलेजा नहीं काँपता । स्त्री जातक इस कदर अवांछित है हमारे समाज में कि संपन्न से संपन्न घर में भी आज भी कन्या का जन्म होने पर कुछ देर...
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ऋषभ Rishabha
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[08 May 2010 17:43 PM]



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