मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू
मित्रो!हमने बडे धोखे खाए हैं। पग-पग पर छले गए हैं। जाने कितनी बार किस किसने हमें ठग लिया और हम अपनी भलमनसाहत की दुहाई देते रहे। भलमनसाहत भी क्या कोई बुरी चीज है ? हर बार हम यही पूछते रहे कि हमने तो किसी का बुरा नहीं किया था; किया क्या, सोचा तक न था; फिर...
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ऋषभ Rishabha
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[08 May 2010 17:43 PM]



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