भारत भ्रष्ट महान
आजादी के पहले तक या उससे 4-5 साल बाद तक भ्रष्टाचार की बात पिछड़ी नहीं लगती थी। वह चौंकाती थी। उस पर गुस्सा आता था। पर आज तो इसकी बात करने पर लोग कहेंगे यह तो अभी भी एक मुद्दे पर अटका हुआ है। पिछड़ा हुआ है। कभी तरक्की नहीं करेगा। हमारे देश में एक नई बात...
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चन्दन कुमार
व्यंग्य
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[08 May 2010 15:29 PM]



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