माँ दिवस पर "युवा सोच युवा खयालात" का विशेषांक
अगर आसमाँ कागद बन जाए, और समुद्र का पानी स्याही, तो भी माँ की ममता का वर्णन पूरा न लिख होगा, लेकिन फिर शायरों एवं कवियों ने समय समय पर माँ की शान में जितना हो सका, उतना लिखा। शायरों और कवियों ने ही नहीं महात्माओं, ऋषियों व अवतारों ने भी माँ को भगवान से...
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Kulwant Happy
कुलवंत हैप्पी
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[08 May 2010 15:13 PM]



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