हरिवंश राय बच्चन जी को समर्पित "प्रियतम की बाला"........'तेज'

साहित्य योग प्रिय की अधर रस में भीगी माला,अपने ही सृंगार में डूबती छाला,रंग रूप के आवेग में समाती बाला,मृद मधुर मिलन करने आती नित्य देवाला।।9।बार-बार मद-मस्त आता पीनेवाला,छल से छलकती घूँट में जीता जीनेवाला,छलकते प्याले को होंठो से पोंछती बाला,दर्शन आश में प्याले पर... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
4
[08 May 2010 14:00 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix