मातृदिवस पर आइये माँ को याद करें -सतीश सक्सेना
अविनाश वाचस्पति का यहाँ लिखा पहला लेख "माता पिता की उंगली श्रष्टिनियंता की होती है " का शीर्षक पढ़ कर ही आँखों में आंसू छलछला उठे, मैंने यह ऊँगली कभी नहीं पकड़ी ! मैंने अपने बचपन में क्या गुनाह किया था कि परमपिता ने यह कठोर कदम उठाया ! शायद धर्म विवेचन...
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सतीश सक्सेना
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[08 May 2010 13:48 PM]



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