नई ग़ज़ल
अब आंखें बंद कैसे मैं कर सकूं बताओतस्वीर देके तुम मुझे जगराते दे गए होकोई नहीं यहाँ पर फिर भी नहीं अकेलायाद आके मुझको महफिल में ले गए हो आंखों में आंसू लेके हंसना नहीं है आसांमुस्कराहटों में भी मेरी बनावट भर गए होस्याही सा बिखर जाऊं मैं किसी सफे...
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माणिक
ग़ज़ल
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[08 May 2010 13:05 PM]



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