नई ग़ज़ल

अशोकनामा   अब आंखें बंद कैसे मैं कर सकूं बताओतस्वीर देके तुम मुझे जगराते दे गए होकोई नहीं यहाँ पर फिर भी नहीं अकेलायाद आके मुझको महफिल में ले गए हो आंखों में आंसू लेके हंसना नहीं है आसांमुस्कराहटों में भी मेरी बनावट भर गए होस्याही सा बिखर जाऊं मैं किसी सफे... [पूरी पोस्ट]
writer माणिक

ग़ज़ल

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
6
[08 May 2010 13:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix