बिना सबुत किसी को दोषी क्यो कहे......दोष हमे ही लगेगा, हमीं पापी बनेगे
यह बात है दो तीन साल पहले की, मेरा घर अलग सा है यानि पडोसी के जाना हो तो सडक पार करनी पडती है, ओर नीचे एक ओफ़िस है, जहां समान बेचा जाता है, ओर गल्ले मै खुब पेसे होते थे, मेरा ओफ़िस पहले वही होता था, फ़िर मैने बदला तो अब मेरा ओफ़िस मेरे घर से ५० मीटर दुर है,...
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राज भाटिय़ा
मेरा देश मेरे लोग
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[08 May 2010 12:24 PM]



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