कविता -नया सवेरा

BAL SAJAG नया सवेराहुआ सवेरा निकला सूरज ,पक्षी खेतों में जाते हैं....खेतों में जाकर दाना खूब खाते हैं,जब दुपहर हो जटी हैं....पेड़ों में पक्षी बैठते हैं,शाम को सूरज ढलता हैं....सब पक्षी घर को जाते हैं,बच्चों के साथ रहते हैं.....चैन की नींद सोते हैं,हुआ सवेरा निकला... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[08 May 2010 11:47 AM]

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