मैं कविता हूँ- शोभना 'शुभि'
मैं कविता हूँकभी दर्द को ओढ़े हुएकभी उल्लास को उकेरे हुएमन के भाव स्याही में डूब करमुझे निर्मित कर देते हैंकभी वीर रस का जोश कभी प्रेम के शब्द मेरे गहने बन मुझे चमका देते हैंकभी चेहरे परमुस्कान उड़ेल देती हूँकभी आंसुओं के समन्दर नयनों में उड़ेल देती हूँ मैं...
[पूरी पोस्ट]
Shobhna Choudhary
49
6
0
6
19
[08 May 2010 11:17 AM]



Shuffle








