मैं कविता हूँ- शोभना 'शुभि'

Shobhna मैं कविता हूँकभी दर्द को ओढ़े हुएकभी उल्लास को उकेरे हुएमन के भाव स्याही में डूब करमुझे निर्मित कर देते हैंकभी वीर रस का जोश कभी प्रेम के शब्द मेरे गहने बन मुझे चमका देते हैंकभी चेहरे परमुस्कान उड़ेल देती हूँकभी आंसुओं के समन्दर नयनों में उड़ेल देती हूँ मैं... [पूरी पोस्ट]
writer Shobhna Choudhary
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[08 May 2010 11:17 AM]

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