मनुष्य के हाथ श्रम की उपज हैं।

अनवरत अर्थशास्त्रियों का दावा है कि श्रम समस्त संपदा का स्रोत है। वास्तव में वह स्रोत है, लेकिन प्रकृति के बाद। वही इसे वह सामग्री प्रदान करती है जिसे श्रम संपदा में परिवर्तित करता है। पर वह इस से भी कहीं बड़ी चीज है। वह समूचे मानव-अस्तित्व की प्रथम मौलिक शर्त... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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[08 May 2010 10:13 AM]

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