कविताएँ : महेंद्रभटनागर
मज़दूरों का गीत [महेंद्रभटनागर] मिल कर क़दम बढ़ाएँ हम
जय, फिर होगी वाम की !
. शोषित जनता जागी है
पीड़ित जनता बाग़ी है आएँ, सड़कों पर आएँ, क्या अब चिंता धाम की !
. ना यह अवसर छोड़ेंगे
काल-चक्र को मोडेंगे शक्लें बदलेंगे, साथी मूक सुबह की, शाम की !
. नारा अब यह...
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Dr. Mahendra Bhatnagar
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[08 May 2010 09:39 AM]



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