'हाय जवानी...तू कहाँ '
बदली शक्ल या नज़रें ही,आईने की कमज़ोर हैं, रंग फीका हो गया,या माजरा कुछ और है, वो रौनकें वो रंग,वो चेहरे कि लाली है कहाँ,अन्धेरा है कमरे में या,बढ़ती उम्र का ज़ोर है ये आँख...
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योगेश शर्मा
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[08 May 2010 09:34 AM]



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