अपनी माँ के लिए एक शहीद के आँसू.....अपनी माँ के लिए जी न सका.....

दिल की कलम से... उसकी साड़ी का मुड़ा कोना देख, मेरी आंख में तिनके का जाना याद आता है,उसका आँचल भीगा पाकर , मुझे डांट कर उसका खुद ही रोना याद आता है,आँखों में उसकी भी सूजन होती थी,जब मैं रातों को सो न पाता था,कलाई पर जलने के निशान भी देखे है, जब मैं गरमा गरम पूडियां खाता... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[08 May 2010 09:25 AM]

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