दौडते समय की, हांफ के बीच, एक बेचैन बयान

नई इबारतें एक बेचैन दिमाग, साफ दिल और हक की बात बोलती जुबान इस समय क्या कर रही होगी? ठीक इस समय जब आप इन पंक्तियों को पढ रहे हैं. क्या कर रही होगी वह आंख जो दुश्मन की शक्ल भी पहचानती है और दुकानदारियों से परे जिसके लिए मुनाफे का मुहावरा सिर्फ सिक्कों की खनक नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer सचिन ..........

कविता

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[08 May 2010 08:38 AM]

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