ANY REMEDY FOR JUDICIAL TORTURE?: दिल्ली से योगेश गुलाटी
जी हां मैं न्यायिक उपचारों की ही बात कर रहा हूँ! हमारे संविधान में प्रदत्त क़ानून के समक्ष समानता आज़ादी के दशकों बाद भी सच्चाई नहीं बन पाई है! आलम ये है कि न्याय पाने की पूरी प्रक्रिया इतनी कष्टप्रद है कि उससे कहीं बेहतर सज़ा भुगतना लगता है! यहां पीड़ित दो...
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Yogesh Gulati
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[08 May 2010 08:10 AM]



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