काश तुम्हें पता होता !

किस से कहें ? तारोंभरा साफ़ आसमान ... गोपनीय रातेंजब हो जाती हैं पहुंच से परे और अनिश्चित सपनों,इच्छाओं,और अपनी ही चेतना से प्रदूषितभारहीन तैरता हूं मैंअनमना, अटपटा... कमज़ोरबसथाम कर एक हाथऔर बैठना निःशब्दकाफ़ी होताकाश तुम्हें पता होता !... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ मीत
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[08 May 2010 04:53 AM]

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