भारत भ्रष्ट महान- भ्रष्टाचार भी एक कला है।
अपनी इच्छा से किसी चीज को चुनना वरदान से कम नहीं होता। सुख का मतलब है कि हम अपना चुनाव खुद कर सकें। लेकिन चुनना एक बात है, आदी हो सकना बिल्कुल दूसरी बात। हम एक जिंदगी से दूसरी जिंदगी में हमेशा गोता लगाना चाहते हैं। कभी इधर, कभी उधर, कहीं का भी नहीं, न...
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चन्दन कुमार
व्यंग्य
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[08 May 2010 04:32 AM]



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