लघुकथा- ठीक हैं हम
‘‘ट्रिंग.... ट्रिंग’’फोन की घंटी घनघनाई। मालती वर्मा ने कुर्सी से उठकर अपने घुटनों की मर्मांतक पीड़ा से उबरने काप्रयास किया। फिर धीरे–धीरे चलकर चोगे तक पहुँचीं।दूसरे सिरे पर दूर शहर से उनकी हमउम्र शीला थी। दोनों अब पैंसठ की उम्र तक जा पहुँची हैं।‘‘और...
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रतन चंद रत्नेश
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[08 May 2010 04:24 AM]



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