प्रेम और समय

स्वार्थ जाने कैसे ऐसा होता है जाने क्यों ऐसे होता है बीते हुए की स्मृर्तियों के साथ साथ आकर जाने कब तुम खिलवाड़ करने लगते हो मेरे फुरसत के लम्हों से| जाने कैसे हज़ारों मीलों लंबी दूरियाँ यूँ पल भर में तय हो जाती हैं और फिर समय बीतता तो है पर इसका एहसास होने... [पूरी पोस्ट]
writer swaarth

poetryLoveprem

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[08 May 2010 03:47 AM]

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