पलक-द्वार
मीन-लोचने! खींच रहा तुमको संगीत हमारा.बोलों की है डोर और भावों का कंटक-चारा.बीन बजाकर खर्च किया धन लय तानों का सारा.खोलो अब ये पलक-द्वार फँसने दो मीन हमारा....
[पूरी पोस्ट]
Pratul
16
3
0
3
0
[08 May 2010 00:22 AM]



Shuffle








