संत कबीर के दोहे-अपनी मति नहीं तो बड़े होने से क्या लाभ (bade hone se kya labh-hindu dharma sandesh)

शब्दलेख सारथी हाथी चढि के जो फिरै, ऊपर चंवर ढुरायलोग कहैं सुख भोगवे, सीधे दोजख जायसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं कि तो हाथी पर चढ़कर अपने ऊपर चंवर डुलवाते हैं और लोग समझते हैं कि वह सुख भोग रहे तो यह उनका भ्रम है वह तो अपने अभिमान के कारण सीधे नरक में जाते हैं।बड़ा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[07 May 2010 23:57 PM]

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