हिन्दू धर्म संदेश-धर्म रहित कार्य केवल मूर्ख आदमी ही करता है (moorkh aadmi karta hai dharma rahit karya-hindu dharma sandesh)
आधिव्याधिविपरीतयं अद्य श्वो वा विनाशिने।कोहि नाम शरीराय धम्मपितं समाचरेत्।।हिन्दी में भावार्थ-तमाम तरह के दुःखों से भरे और कल नाश होने वाले इस शरीर के लिये धर्म रहित कार्य केवल कोई मूर्ख आदमी ही कर सकता है।महावाताहृतभ्त्रान्ति मेघमालातिपेलवैः।कष्टां नाम...
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दीपक भारतदीप
astha
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[08 May 2010 00:17 AM]



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