निशाते-दर्दे-पैहम से अलग हैं

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش निशाते-दर्दे-पैहम से अलग हैं।ख़ुशी के ज़ाविए ग़म से अलग हैं॥दिलों को रोते कब देखा किसी ने, ये आँसू चश्मे-पुरनम से अलग हैं॥तलातुम-ख़ेज़ियाँ वीरानियों की, हिसारे-शोरे-मातम से अलग हैं॥शिकनहाए-जबीने-होश्मन्दाँ,ख़ुतूते-इस्मे-आज़म से अलग हैं॥बज़ाहिर साथ रहकर... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
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[07 May 2010 23:55 PM]

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