रहीम दर्शन-नदी के तट को पार करने वाला पानी व्यर्थ चला जाता है (rahim ke dohe-nadi aur pani)
जो मरजाद चली सदा, सोई तो ठहरायजो जल उमगै पारतें, कहे रहीम बहि जाय कविवर रहीम कहते हैं कि जो सदा से मर्यादा चली आती है, वही स्थिर रहती है। जो पानी नदी के तट को पार करके जाता है वह बेकार हो जाता है। जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिंगिरधर मुरलीधर...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू
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[07 May 2010 23:48 PM]



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