....रोवें देवकी रनिया जेहल खनवा

एक आलसी का चिठ्ठा पुनर्प्रस्तुति वाराणसी। अर्धरात्रि। छ: साल पहले की बात। सम्भवत: दिल्ली से वापस होते रेलवे स्टेशन पर उतर कर बाहर निकला ही था कि कानों में कीर्तन भजन गान के स्वर से पड़े:"....रोवें देवकी रनिया जेहल खनवा"इतनी करुणा और इतना उल्लास एक साथ। कदम ठिठक गए।... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव
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[07 May 2010 22:51 PM]

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