निजार कब्बानी की कविता जो वर्षों पहले निरूपमा के लिए ही लिखी थी

नई बात पारिवारिक तानाशाही का शिकार बन चुकी निरूपमा ने अपनी मृत्यु के बाद एक बड़ा काम किया है. विभाजक रेखा खींची है: ढोगियो और पाखंडियों को इतनी आसानी से मंच पर कभी नहीं देखा गया जो उस परिवार के सुख चैन के लिए हो-हल्ला मचा रहे है जिसने, अगर रिश्वतखोरो और दबाव बना... [पूरी पोस्ट]
writer चन्दन

कविता

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[07 May 2010 13:53 PM]

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