निर्मल और मैं....

मौन में बात.. मैं- इतनी रात गए.. खामोश बैठे हैं?निर्मल- कितना बज रहा होगा?मैं- करीब एक...।निर्मल- कितने रतजगों की कालिख आँखों के नीचे फैली पड़ी है... है ना?मैं- हाँ।निर्मल- किस लिए? क्यों? क्या है वह चीज़ जिसे लगातार टटोलते रहना होता है। कौन सा खिलौना है वह जिससे... [पूरी पोस्ट]
writer मानव

अपने से...

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[07 May 2010 12:36 PM]

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