(कविता) -तुम

अशोकनामा Shareजीवन की कठिन दोपहरी मेंमेरे पथ की छाया तुम होगीफिर छाँव-गाँव  मिल जाएंगेवो छाँव-गाँव भी तुम होगीमंज़िल है मुझसे दूर बहुतऔर प्यासा सा चातक मनपथ पे कहीं जो नीर मिलातो नदी किनारा तुम होगीआंखों ने सपने कई देखेसपने सच तो नहीं होतेभोर स्वपन ही सच... [पूरी पोस्ट]
writer माणिक

कविता

views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
1
[07 May 2010 12:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix