ख़ुशी : यश तिवारी की कविता का हिंदी भावानुवाद
ख़ुशीजब मैं भूल जाता हूँ -अपनी क़िताब! कोई समस्या नहीं होती, क्योंकि मैं इसे साझा कर लेता हूँ! लेकिन एक दिन यदि मैं भूल जाता हूँ - अपना बस्ता! तब क्या होता है? मैं बाहर खड़ा हो जाता हूँ! कोई समस्या नहीं होती, क्योंकि मेरे पास हैं दो पैर खड़े होने के लिए!...
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रावेंद्रकुमार रवि
भावानुवाद
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[07 May 2010 10:47 AM]



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