उदास धूप

A poetess blog पीले से पत्तों के नीचेछुपी हुई है छांव दुबक करधूप उदास अकेली उसकोढून्ढ रही है सुबक सुबक करबहुत दिनों से नहीं मिले वो छोरजहाँ दोनों मिलते थेआधे ठन्डे, आधे गर्म फर्श परकुछ लम्हे खिलते थेबहुत देर से देख रही थी हवाधूप के नैना गीलेउड़ा ले गयी एक झोंके मेंसारे... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[07 May 2010 10:20 AM]

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