यूँ छिटकी चाँदनी

बिखरे  मोती तेरी ख्वाहिशों के  चाँद ने  मेरे मन के  सागर को  ज्यों ही छुआ  लहरों के  उद्दाम वेग से  साहिल पर  बिछी  तपती रेत पर  जैसे  चाँदनी  बरस गयी ... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[07 May 2010 09:33 AM]

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