रिक्शा चलाने वाले ही धर्म की रक्षा करते हैं!!!

कुछ ईधर की, कुछ उधर की धर्म, अधर्म का जितना ज्ञान हमें गुरूकुल में रहते "आचार्य" की पढाई के दौरान भी नहीं हुआ होगा, उससे कहीं अधिक ज्ञान हम इस ब्लागनगरी में रहते हासिल कर चुके हैं, वो भी सिर्फ चन्द महीनों में। सुबह शाम धर्म आख्ययान, प्रवचन सुनकर हमें तो ऎसा लगने लगा है कि... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[07 May 2010 08:55 AM]

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