उत्तरकाँड बदल सकते हैं, हम अपने हिंदायन का....

दिल की कलम से... बालकांड-------------------इक बचपन साधन की दुनिया मे एकाकी मग्न हुआ...सुख सुविधा की दुल्हनिया से बचपन मे ही लग्न हुआ...न आँचल की छाया पाई न बाबा का प्यार मिला...रखी इस एककीपन ने एक नयी आधारशिला...आदर जैसे शब्द सहम के तिलचट्टे से दुबक गये...अपनापन और प्यार... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[07 May 2010 08:25 AM]

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