स्वारथ जब दिमाग पर छाया रिश्ते टूट गए...

Nayachintan इस क्रूर समय में अच्छे लोगों का जीना कठिन हो गया है, बाहर की क्या बात करुँ , अब तो घर-घर में नफ़रत और अलगाव का मंज़र नज़र आने लगे हैं. दुःख होता है देख कर, जब एक भाई दूसरे भाई की जान लेने पर आमादा हो जाता है,क्योंकि उसे संपत्ति में बंटवारा चाहिए. यह दौलत... [पूरी पोस्ट]
writer girish pankaj

गिरीश पंकज

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[07 May 2010 08:32 AM]

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