सबके दिल की बात है गजल
गजल कहना और सुनना किसे पसंद नहीं है। इसकी खास वजह है, उसकी लय और उसमें निहित अर्थ का स्फोट। यह विधा पूर्व-अरेबियन कविता से छठीं शताब्दी के कुछ पहले निकली। फारसी साहित्य में गजल का वर्चस्व दिखता है। वहीं से यह अरबी, तुर्की, पश्तो और बाद में उर्दू में आयी।...
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डा.सुभाष राय
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[07 May 2010 07:12 AM]



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